चार दिन कि ज़िन्दगी

 चार दिन कि ज़िन्दगी है ओर मेरा पहला दिन रविवार निकला कुछ यूं 

           सुबह हुई नौ बजे नहाया 12 बजे खाना खाया एक बजे 

फिर सोया तो शाम हो गई अब रात को खाना खाया सुबह दूसरा दिन है आफिस जाना है ज़िन्दगी का एक दिन यु ही निकाल दिया अब मेरे पास तीन दिन ओर है वो भी निकल ही जायेंगे।

       ज़िन्दगी है बची मेरी तीन दिन की.....

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