कुछ यूं कहा उसने....

 शब्द कहे थे मैंने उन दिनों वे मतलब के शायद उसको वो समझ न पायी

          ये मेने ही सोच लिया शायद आखिरी मुलाकात के शब्दों का चयन मेरे द्वारा कुछ ज्यादा अच्छा भी हो सकता था ।

तो कहानी शिरू होती है एक लाइब्रेरी से 

         मैं ओर मेरी प्यारी तनु हमारी मुलाकात एक लाइब्रेरी में हुई थी पढाकु वो कुछ ज्यादा थी और मैं मन मारकर किताब में अपना सिर्फ शिर मारा करता था समझने कुछ आता नहीं था सपने बड़े थे किसी बोला था कि जितना पढ़ोगे उतने जल्दी तुमहारे सपने पूरे होंगे इसलिए किताबों से घिरा रहकर भी किताब पर कम ओर तनु जी पर ज्यादा ध्यान था।

      पानी की बोतल पहली बार बात करने का जरीया बनी,वो गर्म पानी पीती थी जो घर से लेकर आती थी ,  असल में मेरी मां भी मुझे गर्म पानी ही रखा करती थी जो मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं था उसने कहा हाय रोहन गर्म पानी है क्या हां है वो न मुझे गर्म पानी पीने की आदत है ये रोहन ने हडवाडाते हुए बोला..

उसने हमम कहा ओर कुछ नहीं पानी पिया और चली गई मोहतरमा अपनी डेस्क पर 

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