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एक अनकही दास्तां

 ज़रूर! नीचे एक दिल को छू लेने वाली और रोचक लव स्टोरी दी गई है — जो सच्चाई, इत्तेफाक और जज़्बातों से भरी है: --- "लाइब्रेरी वाला प्यार" – एक अनकही दास्तान किरदार: आरव: एक शांत, किताबों में डूबा रहने वाला लड़का। इंजीनियरिंग का स्टूडेंट। सिया: ज़िंदादिल, चुलबुली और रोमांस नॉवेल्स की दीवानी। कहानी शुरू होती है... सर्दियों की एक सुबह, कॉलेज की लाइब्रेरी में आरव अपने प्रोजेक्ट की किताबें खोज रहा था। तभी एक लड़की तेज़ी से आती है और उसी शेल्फ से "Love in the Time of Cholera" निकाल लेती है — वही किताब जो आरव को भी चाहिए थी। आरव कुछ नहीं कहता, बस मुस्कुरा देता है। अगले कुछ दिनों तक वो दोनों लाइब्रेरी में एक-दूसरे को देखते रहे, कभी आँखों से मुस्कान, तो कभी किताबों के पन्नों में छिपे मैसेजेस। एक दिन, आरव ने एक किताब "The Fault in Our Stars" के बीच एक नोट रखा: > "क्या तुम चाय पर चलोगी? लाइब्रेरी के बाहर वाली कैंटीन में, आज 4 बजे।" सिया मुस्कराई... और ठीक 4 बजे पहुँची। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदली। दोनों की दुनिया अलग थी — आरव practical था, सिया dreamy।...

चार दिन कि ज़िन्दगी

 चार दिन कि ज़िन्दगी है ओर मेरा पहला दिन रविवार निकला कुछ यूं             सुबह हुई नौ बजे नहाया 12 बजे खाना खाया एक बजे  फिर सोया तो शाम हो गई अब रात को खाना खाया सुबह दूसरा दिन है आफिस जाना है ज़िन्दगी का एक दिन यु ही निकाल दिया अब मेरे पास तीन दिन ओर है वो भी निकल ही जायेंगे।        ज़िन्दगी है बची मेरी तीन दिन की.....

कुछ यूं कहा उसने....

 शब्द कहे थे मैंने उन दिनों वे मतलब के शायद उसको वो समझ न पायी           ये मेने ही सोच लिया शायद आखिरी मुलाकात के शब्दों का चयन मेरे द्वारा कुछ ज्यादा अच्छा भी हो सकता था । तो कहानी शिरू होती है एक लाइब्रेरी से           मैं ओर मेरी प्यारी तनु हमारी मुलाकात एक लाइब्रेरी में हुई थी पढाकु वो कुछ ज्यादा थी और मैं मन मारकर किताब में अपना सिर्फ शिर मारा करता था समझने कुछ आता नहीं था सपने बड़े थे किसी बोला था कि जितना पढ़ोगे उतने जल्दी तुमहारे सपने पूरे होंगे इसलिए किताबों से घिरा रहकर भी किताब पर कम ओर तनु जी पर ज्यादा ध्यान था।       पानी की बोतल पहली बार बात करने का जरीया बनी,वो गर्म पानी पीती थी जो घर से लेकर आती थी ,  असल में मेरी मां भी मुझे गर्म पानी ही रखा करती थी जो मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं था उसने कहा हाय रोहन गर्म पानी है क्या हां है वो न मुझे गर्म पानी पीने की आदत है ये रोहन ने हडवाडाते हुए बोला.. उसने हमम कहा ओर कुछ नहीं पानी पिया और चली गई मोहतरमा अपनी डेस्क पर